प्रस्तुत शोध का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्थिति तथा परिवार में उनकी निर्णयकारी भूमिका के बीच संबंध का अ/ययन करना है। अ/ययन के लिए जयपुर, राजस्थान को अ/ययन क्षेत्र के रूप में चयनित किया गया है। शोध में महिला की रोजगार स्थिति, व्यक्तिगत आय, आय पर नियंत्रण, बैंकिंग सुविधा, बचत, संपत्ति के स्वामित्व तथा परिवार के आर्थिक एवं सामाजिक निर्णयों में भागीदारी को आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रमुख आयामों के रूप में शामिल किया गया है। अ/ययन की प्रकृति वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक है तथा प्राथमिक आंकड़ों के संग्रह के लिए सर्वेक्षण प्रविधि एवं संरचित प्रश्नावली का प्रयोग प्रस्तावित है। अ/ययन में 200 महिलाओं को न्यादर्श के रूप में शामिल किया गया है, जिसमें ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को सम्मिलित किया जाएगा। आंकड़ों के विश्लेषण के लिए आवृत्ति, प्रतिशत, काई-स्क्वायर, सहसंबंध तथा आवश्यकता के अनुसार अन्य सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग किया जाएगा। अ/ययन का प्रमुख आधार यह है कि महिला की आर्थिक आत्मनिर्भरता केवल आय अर्जित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आय पर नियंत्रण और आर्थिक संसाधनों तक स्वतंत्र पहुंच भी उसके सशक्तिकरण के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। अ/ययन से यह समझने का प्रयास किया गया है कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिलाएं बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू खर्च, बचत, निवेश तथा संपत्ति जैसे निर्णयों में किस सीमा तक भागीदारी करती हैं। शोध के आधार पर यह निष्कर्ष सामने आता है कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और परिवार में उनकी निर्णय लेने की क्षमता के बीच सकारात्मक संबंध है। हालांकि रोजगार और आय में वृद्धि के बावजूद संपत्ति, निवेश और बड़े आर्थिक निर्णयों में महिलाओं की पूर्ण स्वायत्तता अभी भी सीमित हो सकती है। शिक्षा, रोजगार, वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग सुविधा, संपत्ति पर अधिकार तथा परिवार का सहयोग महिलाओं की निर्णय क्षमता को मजबूत करने वाले प्रमुख कारक हैं। अतः महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण के लिए केवल रोजगार उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। महिलाओं को आय पर नियंत्रण, वित्तीय संसाधनों तक पहुंच, संपत्ति के अधिकार और परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में समान भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। इस दिशा में शिक्षा, कौशल विकास, स्वयं सहायता समूह, महिला उद्यमिता और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण होगा।