प्रस्तुत शोध पत्र जयपुर जिले के माध्यमिक स्तर के राजकीय (सरकारी) एवं गैर-राजकीय (निजी) विद्यालयों में शिक्षकों के कक्षागत संवादात्मक व्यवहार और विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि के मध्य अंतर्संबंधों का सांख्यिकीय विवेचन करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य तीनों निर्धारित शून्य परिकल्पनाओं के माध्यम से प्रबंधकीय तंत्र (सरकारी बनाम गैर-सरकारी) तथा लिंग भेद (छात्र एवं छात्राएं) के आधार पर विद्यार्थियों के शैक्षणिक संप्राप्ति स्तर में व्याप्त अंतर का तुलनात्मक अन्वेषण करना है। अनुसंधान के अंतर्गत विवरणात्मक सर्वेक्षण एवं प्रत्यक्ष अवलोकन विधि का प्रयोग किया गया है न्यादर्श के रूप में जयपुर जिले के माध्यमिक विद्यालयों से यादृच्छिक प्रतिचयन विधि द्वारा कुल 60 शिक्षकों तथा उनकी कक्षाओं के कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों का चयन किया गया। कक्षागत अंतःक्रिया के मापन हेतु फ्लैंडर्स अंतःक्रिया विश्लेषण श्रेणी प्रणाली (FIACS) का उपयोग किया गया तथा विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि के मूल्यांकन हेतु उनके कक्षा 8वीं के अंतिम परीक्षा परिणामों को आधार बनाया गया। संकलित प्रदत्तों (Data) के विश्लेषण हेतु मध्यमान (Mean), मानक विचलन SD) तथा टी-परीक्षण (t-test) सांख्यिकीय प्रविधियों का अनुप्रयोग किया गया। सांख्यिकीय विश्लेषण के परिणाम यह दर्शाते हैं कि समग्र विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि में गैर-सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों का प्राप्तांक माध्य (M =77.87, SD = 5-49) सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों (M = 65-39, SD = 3-04) की तुलना में पर्याप्त अधिक है, और प्राप्त t-मूल्य (10.85) 0.01 स्तर पर सार्थक होने के कारण प्रथम शून्य परिकल्पना निरस्त होती है। इसी प्रकार, शिक्षकों की कक्षागत अंतःक्रिया के सापेक्ष जब केवल छात्रों की शैक्षिक उपलब्धि का विश्लेषण किया गया, तो गैर-सरकारी समूह का मा/य (M = 75-53, SD = 5-28) सरकारी समूह (M =64-37, SD = 4-24) से अधिक पाया गया और प्राप्त t-मूल्य (6.93) सांख्यिकीय रूप से सार्थक रहा, जिससे द्वितीय परिकल्पना भी अस्वीकृत हुई। छात्राओं के संदर्भ में भी गैर-सरकारी वर्ग का प्राप्तांक मा/य (M =78-27, SD =5-80) सरकारी वर्ग (M = 66-31, SD = 2-83) की अपेक्षा सांख्यिकीय रूप से उत्कृष्ट दर्ज किया गया और प्राप्त ज-मूल्य (9.88) के आधार पर तृतीय शून्य परिकल्पना भी अस्वीकार की गई। परिणाम सुस्पष्ट करते हैं कि सकारात्मक कक्षागत अंतःक्रिया और संस्थागत वातावरण छात्र-छात्राओं दोनों के संप्राप्ति स्तर को बढ़ाने में प्राथमिक भूमिका निभाते हैं। यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों के अधिगम स्तर को सुधारने के लिए कक्षागत वातावरण को अधिक संवादात्मक, अप्रत्यक्ष और छात्र-केंद्रित बनाने की तात्कालिक आवश्यकता है। यह शोध शिक्षा प्रशासकों को शिक्षकों हेतु व्यवहार-परक प्रशिक्षण नीतियां निर्मित करने के लिए एक वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है।