INTERNATIONAL JOURNAL OF ACADEMIC EXCELLENCE AND RESEARCH (IJAER) e-ISSN: 3107-3913 ( Vol. 02 | No. 2 | April - June, 2026 )

जयपुर जिले का औद्योगिक विकास एवं इसका पर्यावरण पर प्रभाव

Author: डॉ. अंकिता गुप्ता (Dr. Ankita Gupta)

जयपुर राजस्थान की राजधानी एवं देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक है। पिछले तीन दशकों में यहाँ औद्योगिक विकास की गति अत्यंत तीव्र रही है। राज्य सरकार द्वारा स्थापित राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (त्प्प्ब्व्) के अंतर्गत जिले में 25 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए हैं, जिनमें सीतापुरा, मानसरोवर, विश्वकर्मा, बगरू एवं कुकस प्रमुख हैं। वर्तमान में जयपुर जिले में 1.2 लाख से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ पंजीकृत हैं, जो रत्न-आभूषण, वस्त्र, रंगाई-छपाई, संगमरमर प्रसंस्करण, रसायन एवं इंजीनियरिंग क्षेत्रों में कार्यरत हैं। यद्यपि इस औद्योगिक विस्तार ने जिले की जीडीपी में उल्लेखनीय योगदान दिया है और लाखों लोगों को रोजगार मिला है, तथापि इसके पर्यावरणीय दुष्प्रभाव भी गंभीर रूप से सामने आए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्टों के अनुसार जयपुर शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक शीतकाल में प्रायः 250 से 350 के मध्य रहता है, जो ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। बगरू एवं सांगानेर क्षेत्र में वस्त्र रंगाई उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट जल ने ढूंढ नदी एवं भूजल को गंभीर रूप से प्रदूषित किया है। भूजल स्तर जिले के अनेक भागों में प्रतिवर्ष औसतन 1 से 2 मीटर की दर से घट रहा है। इसके अतिरिक्त, औद्योगिक विस्तार के कारण जिले में 1990 के बाद से लगभग 18,000 हेक्टेयर कृषि एवं हरित भूमि का ह्रास हुआ है। प्रस्तुत शोध पत्र में जयपुर जिले के औद्योगिक विकास की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान स्वरूप एवं इससे उत्पन्न वायु, जल तथा भूमि प्रदूषण का विश्लेषण किया गया है। साथ ही यह अध्ययन धारणीय औद्योगिक विकास की दिशा में नीतिगत सुझाव भी प्रस्तुत करता है, ताकि आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के मध्य संतुलन स्थापित किया जा सके।

DOI:

Article DOI:

DOI URL:

Download Full Paper: