INTERNATIONAL JOURNAL OF ACADEMIC EXCELLENCE AND RESEARCH (IJAER) e-ISSN: 3107-3913 ( Vol. 02 | No. 2 | April - June, 2026 )

स्मार्ट पंचायत और महिला नेतृत्वः टेक्नोलॉजी के उपयोग का विश्लेषण

Author: प्रियंका चौधरी एवं डॉ. जगमाल सिंह शेखावत (Priyanka Choudhary & Dr. Jagmal Singh Shekhawat)

“स्मार्ट पंचायत और महिला नेतृत्वः टेक्नोलॉजी के उपयोग का विश्लेषण” विषय पर आधारित यह शोध-पत्र ग्रामीण भारत में डिजिटल गवर्नेंस और महिला नेतृत्व के बदलते संबंधों को समझने का प्रयास करता है। अ/ययन यह स्पष्ट करता है कि “स्मार्ट पंचायत” केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सहभागी बनाने की प्रक्रिया है। डिजिटल इंडिया अभियान के बाद पंचायतों में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल, डिजिटल भुगतान, जीआईएस मैपिंग और बायोमेट्रिक उपस्थिति जैसी व्यवस्थाएँ लागू हुईं, जिन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को नया स्वरूप दिया। शोध-पत्र में यह विश्लेषण किया गया है कि पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों की भूमिका अब केवल औपचारिक नहीं रह गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने उन्हें प्रशासनिक जानकारी तक सीधी पहुँच प्रदान की है, जिससे उनके आत्मविश्वास और निर्णय-क्षमता में वृद्धि हुई है। कई महिला सरपंच अब योजनाओं की निगरानी, वित्तीय पारदर्शिता और नागरिक संवाद में तकनीकी साधनों का उपयोग कर रही हैं। डिजिटल भुगतान प्रणाली ने भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका को कम करने में भी सहायता की है। हालाँकि, अ/ययन यह भी दर्शाता है कि तकनीक का लाभ सभी महिलाओं तक समान रूप से नहीं पहुँच पाया है। तकनीकी साक्षरता का अभाव, इंटरनेट और संसाधनों की कमी, स्थानीय भाषाई समस्याएँ, साइबर सुरक्षा का खतरा और पितृसत्तात्मक मानसिकता जैसी बाधाएँ महिला नेतृत्व को प्रभावित करती हैं। कई क्षेत्रों में “प्रधान-पति” की प्रवृत्ति डिजिटल मा/यमों में भी दिखाई देती है, जहाँ तकनीकी कार्य पुरुष सदस्य नियंत्रित करते हैं। शोध-पत्र का निष्कर्ष यह है कि स्मार्ट पंचायत की सफलता केवल डिजिटल उपकरणों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि तकनीक को सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और स्थानीय भागीदारी से कितना जोड़ा जाता है। महिला प्रतिनिधियों के लिए स्थानीय भाषा आधारित प्रशिक्षण, डिजिटल सहयोग केंद्र, साइबर सुरक्षा जागरूकता और प्रशासनिक संवेदनशीलता को मजबूत करना आवश्यक है। अ/ययन यह मानता है कि यदि तकनीक को समावेशी दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाए, तो स्मार्ट पंचायत ग्रामीण लोकतंत्र को अधिक प्रभावी और मानवीय बना सकती है।

DOI:

Article DOI: 10.62823/IJAER/02.02.217

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