INTERNATIONAL JOURNAL OF ACADEMIC EXCELLENCE AND RESEARCH (IJAER) e-ISSN: 3107-3913 ( Vol. 02 | No. 1 | January - March, 2026 )

प्राचीन भारतीय दर्शन और आधुनिक लेखांकन प्रणाली का समन्वयः श्रीरामचरितमानस में वर्णित पंचमहाभूत सिद्धांत का विश्लेषणात्मक अ/ययन

Author: अशोक कुमार मिश्रा, डॉ. मनविन्दर सिंह पाहवा एवं सुलेखा चौरसिया (Ashok Kumar Mishra, Dr. Manvinder Singh Pahwa & Sulekha Chorasiya)

भारतीय दार्शनिक परंपरा में पंचमहाभूत पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश सृष्टि की संरचना और संतुलन का मूल आधार हैं। तुलसीदास ने रामचरितमानस के सुंदरकांड दोहा 58 में इन्हें जड़ तत्व बताते हुए सृष्टि के निर्माण और संचालन में ईश्वर की प्रेरणा को दर्शाया है। इस शोध का उद्देश्य इन प्राकृतिक तत्वों की दार्शनिक अवधारणा और आधुनिक लेखांकन के संतुलन सिद्धांत (लेखा समीकरण) के म/य वैचारिक संबंध स्थापित करना है। गुणात्मक शोध और साहित्य विश्लेषण से यह पता चलता है कि प्राकृतिक तत्वों का संतुलन और लेखांकन समीकरण दोनों समरूपता और संतुलन के सिद्धांत को प्रतिबिंबित करते हैं। परिणामस्वरूप यह अ/ययन भारतीय आ/यात्मिक दर्शन और आधुनिक लेखांकन के म/य नैतिक, दार्शनिक और उत्तरदायित्वपूर्ण समन्वय स्थापित करने में सहायक सिद्ध होता है।

DOI:

Article DOI: 10.62823/IJAER/2026/02.01.188

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