INTERNATIONAL JOURNAL OF ACADEMIC EXCELLENCE AND RESEARCH (IJAER) e-ISSN: 3107-3913 ( Vol. 02 | No. 1 | January - March, 2026 )

मुगलकाल में महिलाओं की शिक्षा व साहित्य में भूमिका का एक विस्तृत ऐतिहासिक अध्ययन

Author: श्री धर्म पाल एवं डॉ महेश चंद्र (Sh. Dharmpal & Dr. Mahesh Chandra)

प्रस्तुत शोध पत्र मुगलकालीन समाज (1526-1857) में महिलाओं की शैक्षिक व्यवस्था, साहित्यिक योगदान और उनके बौद्धिक सशक्तिकरण का आलोचनात्मक और विस्तृत विश्लेषण करता है। यद्यपि मुगलकालीन समाज एक पितृसत्तात्मक ढांचे पर आधारित था जहाँ पर्दा प्रथा और अनेक सामाजिक सीमाएँ विद्यमान थीं, फिर भी ऐतिहासिक साक्ष्य प्रमाणित करते हैं कि शाही, कुलीन और यहाँ तक कि तवायफ वर्ग की महिलाओं ने शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया। प्रारंभ में महिलाओं की शिक्षा मुख्यतः धार्मिक और नैतिक थी, परंतु समय के साथ उन्होंने फारसी, अरबी, उर्दू और स्थानीय लोकभाषाओं में उत्कृष्ट साहित्य सृजन किया। शाही महिलाओं ने केवल अध्ययन ही नहीं किया, बल्कि कला, संगीत और शिक्षण संस्थानों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह शोध पत्र यह स्पष्ट करता है कि जहाँ गुलबदन बेगम, नूरजहाँ और मुमताज महल जैसी महिलाओं ने दरबार में रहकर साहित्यिक चेतना जगाई, वहीं भक्ति आंदोलन और तवायफ संस्कृति ने आम और शहरी महिलाओं को सामाजिक व सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का स्वतंत्र मंच प्रदान किया।

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DOI:

Article DOI: 10.62823/IJAER/2026/02.01.176

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