INTERNATIONAL JOURNAL OF ACADEMIC EXCELLENCE AND RESEARCH (IJAER) e-ISSN: 3107-3913 ( Vol. 02 | No. 1 | January - March, 2026 )

उदयपुर जिले के ग्रामीण जीवन स्तर पर पर्यटन विकास का प्रभावः एक भौगोलिक विश्लेषण

Author: डॉ. पूजा व्यास (Dr. Pooja Vyas)

उदयपुर जिले के भौगोलिक एवं प्राकृतिक परिस्थितियाँ, सामाजिक एवं सांस्कृतिक भिन्नताएँ राजस्थान के पर्यटन विकास में अपनी अहम भूमिका बयान करती है। यहाँ के ग्रामीण क्षेत्र अपनी लोक कलाओं, लोक नृत्य और हस्तशिल्प के लिए विश्व विख्यात है। यहाँ की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विरासत और खुला हुआ प्राकृतिक वातावरण, सुंदर दूर-दूर तक फैली पहाड़ियाँ, राजस्थान के अन्य क्षेत्रों से सबसे पहले पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। प्राप्त आंकड़ों से ज्ञात होता है कि राजस्थान में पर्यटकों की संख्या 84ः प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रही है। जिसमें उदयपुर जिले का स्थान सर्वोपरि है। आगामी पंचवर्षीय योजना में विश्व पर्यटन की दृष्टि नवीनतम सुविधाओं एवं स्थानीय आकर्षण के कारण भारतीय पर्यटन में लगभग 10ः वृद्धि होने की आशा है जिसमें राजस्थान का मुख्य योगदान रहेगा। ग्रामीण पर्यटन के विकास के लिए सबसे जरूरी ग्रामीणों के बीच जागरूकता को बढ़ाना वह देश-विदेश में ग्रामीण पर्यटन की कुशल विपणन रणनीति तैयार करना है। इसके आलेखित गाँव में स्थानीय आधारभूत, भौतिक व तकनीकी सुविधाओं को बढ़ाकर ग्रामीण जीवन स्तर पर विशेष प्रभाव डाला जा सकता है। इस समीक्षा पत्र का उद्देश्य यह अ/ययन करना है कि पर्यटन विकास ने उदयपुर जिले के साथ-साथ संपूर्ण राजस्थान के ग्रामीण विकास में किस प्रकार योगदान दिया है। इस अ/ययन में विभिन्न पहलुओं पर /यान केंद्रित किया गया है जैसे पर्यटन के द्वारा ग्रामीण रोजगार के अवसरों का सृजन, स्थानीय व्यवसायों का विकास और बुनियादी ढांचे में सुधार। पर्यटन राजस्थान के विभिन्न ग्रामीण की पारंपरिक कला, संस्कृति और इतिहास को संरक्षित और प्रसारित करने का एक प्रभावी तरीका भी है। पर्यटन विकास न केवल सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में सहायक है बल्कि यह जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और समृद्धि का स्रोत भी बना है।

1.    शर्मा, एच.एस., राजस्थान का भूगोल, पंचशील प्रकाशन, जयपुर।
2.    राजस्थान पर्यटन विभाग- वार्षिक पर्यटन रिपोर्ट 2010, जयपुर, राजस्थान सरकार।
3.    शर्मा, बी और राठौर के (2010) राजस्थान में इको-टूरिज्म और वन्यजीव प्रबन्धन। पर्यावरण पर्यटन जर्नल 9 (3) 78- 911।
4.    मेहता, सारा और भाटी आर. (2011) राजस्थान में पर्यटन के सामाजिक, आर्थिक प्रभाव, जर्नल और रूरल डवलपमेन्ट 36(2), 98-1121।
5.    यू एन डब्ल्यू टी ओ (2009) एशिया में पर्यटन और सतत् विकास, संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन।
6.    व्यास, राजेश कुमार (2004) राजस्थान में पर्यटन प्रबन्धन, राजस्थानी ग्रन्थागार जोधपुर।
7.    वर्मा, रश्मि (2017) भारत में ग्रामीण पर्यटन में संभावनाएँ, कुरूक्षेत्र वर्ष 64 अंक 2 दिसम्बर पृष्ठ संख्या 56।
8.    प्रगति प्रतिवेदन (2015-16)  पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकार।

9.    tourism.rajasthan.gov.in

10.  tourism.gov.in

DOI:

Article DOI: 10.62823/IJAER/2026/02.01.175

Download Full Paper: